
जंग का असर: भारत में किन-किन चीजों की बढ़ सकती है कीमत
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था में भी साफ दिखाई देने लगा है। भारत की ऊर्जा आयात पर भारी निर्भरता होने के कारण Strait of Hormuz में किसी भी तरह की बाधा सीधे देश की महंगाई और सप्लाई पर असर डाल सकती है। यही समुद्री मार्ग भारत के लगभग 90% LPG और कच्चे तेल की बड़ी मात्रा की आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
रसोई से लेकर डिजिटल बाजार तक अब “जंग टैक्स” जैसा असर महसूस किया जा रहा है। इसके कारण कई वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं और सप्लाई में देरी भी हो रही है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार ने सप्लाई को स्थिर बनाए रखने के लिए Essential Commodities Act, 1955 लागू किया है। मौजूदा कमी का बड़ा कारण अफवाहें और घबराहट में की जा रही ज्यादा खरीदारी भी माना जा रहा है।
Press Information Bureau (PIB) फैक्ट चेक और पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी लोगों से फेक न्यूज से सावधान रहने की अपील की है। सरकार के अनुसार भारत के पास 12 से 16 हफ्तों का बफर स्टॉक मौजूद है और घरेलू LPG उत्पादन को लगभग 25% तक बढ़ा दिया गया है।
मार्च 2026 में महंगाई का दबाव क्यों बढ़ रहा है
मार्च 2026 के मध्य तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है। इसके कारण भारत में “आयातित महंगाई” का दबाव बढ़ रहा है।
लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा लागत बढ़ने से घरेलू बाजार में इसका असर लगातार देखने को मिल रहा है। फरवरी में महंगाई दर 3.2% थी, लेकिन फ्रेट इंश्योरेंस और ऊर्जा सरचार्ज बढ़ने से CPI लगभग 5% तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
इसके साथ ही भारतीय रुपया करीब ₹93 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे में सोने जैसी सुरक्षित निवेश संपत्तियों की मांग भी बढ़ रही है।
रसोई और घरेलू जरूरी चीजें हो रहीं महंगी
LPG (रसोई गैस)
14.2 किलो का घरेलू सिलेंडर ₹60 महंगा होकर लगभग ₹913 हो गया है।
19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर ₹115 महंगा हो गया है।
स्टॉकबाजी रोकने के लिए LPG बुकिंग गैप में भी बदलाव किया गया है:
शहरों में 25 दिन
गांवों में 45 दिन
खाने वाले तेल
पाम और सनफ्लावर ऑयल की कीमत ₹15 से ₹20 प्रति किलो तक बढ़ गई है।
इसका मुख्य कारण बढ़ता फ्रेट और इंश्योरेंस खर्च है।
पैक्ड पानी
प्लास्टिक बोतलों में इस्तेमाल होने वाले पॉलिमर महंगे होने से पैक्ड पानी की कीमत ₹1 से ₹2 प्रति बोतल तक बढ़ सकती है।
लाइफस्टाइल और रोजमर्रा के खर्च पर भी असर
इंडक्शन चूल्हे और बर्तन
LPG की कीमत बढ़ने के बाद इंडक्शन चूल्हों की मांग अचानक बढ़ गई है।
मांग लगभग 30 गुना बढ़ने की खबर है।
कीमतों में ₹400 से ₹600 प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी देखी जा रही है।
रेस्टोरेंट खर्च
कई रेस्टोरेंट ने बढ़ते गैस और ईंधन खर्च को देखते हुए:
बिल में 10 से 15% “फ्यूल सरचार्ज” जोड़ दिया है
कुछ गैस ज्यादा इस्तेमाल होने वाले व्यंजन मेनू से हटा दिए गए हैं।
यात्रा और ऊर्जा क्षेत्र पर असर
पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिलहाल सरकार द्वारा काफी हद तक नियंत्रित रखी जा रही हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें अभी भी 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं।
वहीं एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) महंगा होने और उड़ानों के रूट बदलने के कारण अंतरराष्ट्रीय हवाई किराए भी बढ़ रहे हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और ज्वेलरी भी हो सकती है महंगी
टेक्नोलॉजी और मरम्मत
हीलियम और ब्रोमिन की सप्लाई में बाधा और कॉपर तथा एल्युमिनियम की कीमतों में उछाल के कारण:
स्मार्टफोन
लैपटॉप
इलेक्ट्रॉनिक मरम्मत
की लागत बढ़ सकती है।
ज्वेलरी
United Arab Emirates और Israel से आने वाले रफ डायमंड की सप्लाई कम होने से गहनों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह:
सरकार के अनुसार देश में जरूरी वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता है। इसलिए लोगों को अफवाहों से बचना चाहिए और घबराकर ज्यादा स्टॉक करने की जरूरत नहीं है।