निवेशकों का ऐक दिन में 5.87 ट्रिलियन का नुकसान, बाजार में भारी गिरावट

शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक लगातार गिरावट के दौर में रहे। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण निवेशक सतर्क हो गए, जिससे बाजार में तेज गिरावट आई।
सुबह 11 बजे तक Nifty 50 लगभग 1.19 प्रतिशत गिरकर 23,356 पर कारोबार कर रहा था, जबकि BSE Sensex 1.07 प्रतिशत गिरकर 75,266 पर आ गया। इस बिकवाली से निवेशकों की संपत्ति में लगभग ₹5.87 ट्रिलियन की कमी आ गई। Bombay Stock Exchange में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण गुरुवार के ₹439.72 ट्रिलियन से घटकर लगभग ₹433.85 ट्रिलियन रह गया।
सेक्टरों में व्यापक गिरावट
सेक्टर सूचकांकों पर नजर डालें तो लगभग सभी क्षेत्रों में बिकवाली देखी गई। सिर्फ FMCG शेयरों को छोड़कर बाकी सभी सेक्टर लाल निशान में रहे, जिनमें मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा गिरा।
महंगाई की चिंता के कारण बैंकिंग शेयरों पर भी दबाव बना रहा। प्रमुख बैंकों जैसे HDFC Bank, ICICI Bank, Punjab National Bank और IndusInd Bank में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी गिरे
कमजोरी सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। Nifty Midcap 150 1.61 प्रतिशत गिर गया, जबकि Nifty Smallcap 250 1.67 प्रतिशत नीचे आ गया। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों में व्यापक स्तर पर जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
टेक्निकल करेक्शन में पहुंचा बाजार
ध्यान देने वाली बात यह है कि Nifty 50 पहले ही “टेक्निकल करेक्शन” में प्रवेश कर चुका है। यह तब माना जाता है जब कोई सूचकांक अपनी हाल की ऊंचाई से 10 से 20 प्रतिशत तक गिर जाता है।
5 जनवरी को 26,373 के अपने उच्च स्तर से यह सूचकांक 10 प्रतिशत से अधिक गिर चुका है।
एशियाई बाजारों में भी गिरावट
शुक्रवार को एशियाई बाजारों में भी तेज गिरावट देखी गई।
जापान का Nikkei 225 लगभग 2 प्रतिशत गिरा, जबकि TOPIX करीब 1.4 प्रतिशत नीचे आया।
दक्षिण कोरिया का KOSPI लगभग 3 प्रतिशत गिर गया और Hang Seng Index भी लाल निशान में रहा। भारतीय बाजार भी इन्हीं वैश्विक रुझानों के साथ गिर गया।
वॉल स्ट्रीट में भी भारी गिरावट
अमेरिकी बाजारों में भी गुरुवार को तेज गिरावट देखी गई।
Dow Jones Industrial Average लगभग 740 अंक गिरकर इस साल पहली बार 47,000 से नीचे बंद हुआ।
S&P 500 करीब 1.5 प्रतिशत गिरा, जबकि Nasdaq Composite में भी गिरावट दर्ज की गई।
ईरान युद्ध का असर
Iran में चल रहा युद्ध दूसरे सप्ताह में पहुंच गया है और इसके कम होने के कोई संकेत नहीं हैं।
ईरान के नए सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने संघर्ष के और बढ़ने की चेतावनी दी है। वहीं Benjamin Netanyahu ने कहा कि इजरायल के हमले ईरान के नेतृत्व को कमजोर करने के लिए किए जा रहे हैं।
इस लंबे संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति मार्गों को प्रभावित किया है, खासकर Strait of Hormuz, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
युद्ध के कारण तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं। अंतरराष्ट्रीय मानक Brent Crude शुक्रवार सुबह 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी मानक West Texas Intermediate लगभग 96 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था।
भारत के लिए ऊंची तेल कीमतें चिंता का विषय हैं क्योंकि देश अपनी अधिकांश तेल जरूरतें आयात करता है। तेल महंगा होने से व्यापार घाटा बढ़ता है, महंगाई बढ़ती है और रुपये पर दबाव पड़ता है। इन सभी का असर शेयर बाजार पर पड़ता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) उभरते बाजारों, जिनमें भारत भी शामिल है, से पैसा निकाल रहे हैं।
वैश्विक अनिश्चितता और विकसित देशों, खासकर अमेरिका में अधिक रिटर्न मिलने के कारण विदेशी पूंजी वहां जा रही है। लगातार FII बिकवाली से बड़े शेयरों पर दबाव बढ़ता है और पूरा बाजार कमजोर हो जाता है।

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