संकटग्रस्त पश्चिम एशिया से 1 मार्च से अब तक 52,000 से अधिक भारतीय लौटे: विदेश मंत्रालय
नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार पश्चिम एशिया में फंसे 52,000 से अधिक भारतीय नागरिक 1 मार्च से 7 मार्च के बीच वाणिज्यिक उड़ानों के जरिए सुरक्षित रूप से भारत लौट आए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्र में ईरान, इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका से जुड़े टकराव के कारण तनाव बढ़ रहा है।
शनिवार को जारी बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में बदलती स्थिति पर नजदीकी नजर रख रही है, खासकर उन भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भलाई पर ध्यान दिया जा रहा है जो ट्रांजिट के दौरान फंस गए थे या थोड़े समय के लिए वहां गए हुए थे।
मंत्रालय के अनुसार पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में हवाई क्षेत्र के आंशिक रूप से फिर से खुलने के बाद भारतीय और विदेशी एयरलाइनों को वाणिज्यिक सेवाएं दोबारा शुरू करने की अनुमति मिली है। इसमें विशेष और गैर-निर्धारित उड़ानें भी शामिल हैं, जिससे फंसे हुए यात्रियों को घर लौटने में मदद मिली है।
बयान में कहा गया, “अब तक 52,000 से अधिक भारतीयों ने इन उड़ानों का लाभ उठाया है और 1 मार्च से 7 मार्च के बीच खाड़ी क्षेत्र से सुरक्षित रूप से भारत लौट आए हैं।”
कुल यात्रियों में से 32,107 लोग भारतीय एयरलाइनों के जरिए यात्रा करके वापस आए हैं। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में और उड़ानें चलाई जाएंगी ताकि वापस लौटना चाहने वाले अन्य यात्रियों की मदद की जा सके।
जिन देशों में अभी वाणिज्यिक उड़ानों की सेवा उपलब्ध नहीं है, वहां रह रहे भारतीय नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे सबसे नजदीकी यात्रा विकल्पों की जानकारी के लिए भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों के संपर्क में रहें।
मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में मौजूद सभी भारतीयों से अपील की है कि वे स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशानिर्देशों और भारतीय कूटनीतिक मिशनों की सलाह का पालन करें। कई दूतावासों ने विस्तृत निर्देश जारी किए हैं और संकट के दौरान नागरिकों की मदद के लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन भी शुरू की है।
इस बीच विदेश मंत्रालय ने स्थिति पर नजर रखने और प्रभावित लोगों तथा उनके परिवारों के सवालों का जवाब देने के लिए एक विशेष कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है।
बयान में कहा गया, “विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भलाई सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और हम क्षेत्र के कई देशों की सरकारों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि जिन लोगों को मदद की जरूरत है, उन्हें सहायता दी जा सके।”

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