ईरान ‘अमेरिकी ज़मीनी हमले’ के लिए तैयार, बातचीत से इनकार: अब्बास अराघची
तेहरान/एजेंसियां/ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि तेहरान किसी भी संभावित तनाव या युद्ध के बढ़ने की स्थिति के लिए तैयार है, क्योंकि ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।
अब्बास अराघची ने NBC Nightly News पर पत्रकार टॉम ल्लामास से बातचीत के दौरान कहा कि यदि अमेरिकी सेनाएं ज़मीनी हमला करती हैं तो ईरान उसके लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान इस समय संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं करना चाहता और न ही उसने युद्धविराम की मांग की है।
यह बयान उस समय आया है जब संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान पर हवाई हमले जारी हैं। ये हमले शनिवार को शुरू हुए बड़े हमले के बाद किए गए हैं। इन हमलों से ईरान की सैन्य रक्षा प्रणाली को भारी नुकसान पहुंचा है और ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत भी हो गई है।
ईरान कहता है कि वह अमेरिकी ज़मीनी हमले के लिए तैयार है
NBC के साथ इंटरव्यू के दौरान जब पूछा गया कि क्या ईरान को अमेरिकी ज़मीनी हमले का डर है, तो अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान इस तरह की स्थिति के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा,
“नहीं, हम उनका इंतजार कर रहे हैं। क्योंकि हमें यकीन है कि हम उनका मुकाबला कर सकते हैं और यह उनके लिए बड़ी तबाही साबित होगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि चल रहे हवाई हमलों के बावजूद ईरान ने अब तक युद्धविराम की मांग नहीं की है।
उन्होंने कहा,
“हमने पिछली बार भी युद्धविराम की मांग नहीं की थी। पिछली बार तो इज़राइल ने युद्धविराम मांगा था। 12 दिनों की लड़ाई के बाद उन्होंने बिना किसी शर्त के युद्धविराम की मांग की थी, जब हमने उनकी आक्रामकता का मुकाबला किया था।”
वह पिछले साल जून में हुई 12 दिनों की लड़ाई का जिक्र कर रहे थे, जब इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका की सेनाओं ने ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया था।
ईरान ने अमेरिका के साथ आगे की बातचीत से इनकार किया
अब्बास अराघची ने कहा कि इस समय ईरान को संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने का कोई कारण नहीं दिखता।
उन्होंने बताया कि पिछले हफ्ते वह जिनेवा में एक संभावित समझौते पर चर्चा के लिए गए थे। वहां डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े लोगों — जैसे दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर — के साथ बातचीत हो रही थी।
लेकिन उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान ही हुए हमलों ने भरोसा तोड़ दिया और चर्चा रुक गई।
उन्होंने कहा,
“असल बात यह है कि हमारे पास अमेरिका के साथ बातचीत का कोई भी सकारात्मक अनुभव नहीं है, खासकर इस प्रशासन के साथ। हमने पिछले साल और इस साल दो बार बातचीत की, लेकिन बातचीत के बीच में ही उन्होंने हम पर हमला कर दिया।”
उन्होंने आगे कहा,
“इसलिए हमें कोई कारण नहीं दिखता कि हम दोबारा उनसे बातचीत करें जो ईमानदारी से मोल-भाव नहीं करते और अच्छी नीयत से बातचीत में नहीं आते।”

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