सत्तू शरबत बनाम व्हे प्रोटीन: कौन ज्यादा हेल्दी और बेहतर प्रोटीन का स्रोत है?
सत्तू शरबत एक पेय है जो भुने चने के आटे, नमक, काली मिर्च और नींबू से बनाया जाता है। वहीं व्हे प्रोटीन एक सप्लीमेंट है जो दूध से बनने वाले प्रोटीन से तैयार किया जाता है।
भारत का पारंपरिक प्रोटीन ड्रिंक सत्तू शरबत और आधुनिक सप्लीमेंट व्हे प्रोटीन, दोनों की प्रोटीन देने की क्षमता अलग-अलग है। भारत में प्लांट-बेस्ड प्रोटीन की बढ़ती मांग के कारण कई लोग अब रोज़ाना प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए सत्तू शरबत की ओर बढ़ रहे हैं।
दरअसल, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और राष्ट्रीय पोषण संस्थान (NIN) के अनुसार भारत में खासकर महिलाओं और बच्चों में प्रोटीन की कमी तेजी से बढ़ रही है। शोध के मुताबिक लगभग 70 से 80% भारतीय लोग आवश्यक मात्रा से कम प्रोटीन लेते हैं।
पर्याप्त प्रोटीन न मिलने से मांसपेशियों की कमजोरी, त्वचा और बालों में बदलाव, इम्यून सिस्टम कमजोर होना और बच्चों में विकास में देरी जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि कौन-सा प्रोटीन स्रोत आपके लिए बेहतर है।
सत्तू शरबत क्या है?
सत्तू शरबत भुने हुए चने के आटे से बनाया जाता है जिसे पानी और मसालों के साथ मिलाकर पिया जाता है।
यह पेय प्लांट-बेस्ड प्रोटीन, फाइबर और आयरन से भरपूर होता है और गर्मियों में शरीर को ठंडक देता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी कम कीमत और आसानी से उपलब्ध होना है।
क्लिनिकल न्यूट्रिशन जर्नल के अनुसार सत्तू शरबत पीने से शरीर को पौधों से मिलने वाला प्रोटीन मिलता है, जो मांसपेशियों की रिकवरी में मदद कर सकता है।
व्हे प्रोटीन क्या है?
चीज़ बनाने की प्रक्रिया के दौरान जो तरल पदार्थ बचता है, उससे व्हे प्रोटीन बनाया जाता है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले आवश्यक अमीनो एसिड होते हैं।
एथलीट और फिटनेस प्रेमियों के बीच यह काफी लोकप्रिय है और कई लोग इसे कॉफी या शेक में भी लेते हैं। हालांकि इसकी सही मात्रा हर व्यक्ति पर अलग-अलग असर डाल सकती है।
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ साइंटिफिक रिसर्च के अनुसार फिटनेस कल्चर के बढ़ने से प्रोटीन की जरूरत के बारे में जागरूकता बढ़ी है और व्हे प्रोटीन सबसे लोकप्रिय सप्लीमेंट बन गया है।
सत्तू शरबत और व्हे प्रोटीन का पोषण तुलना
ICMR और NIN के अनुसार दोनों के पोषण तत्व अलग-अलग होते हैं।
प्रोटीन मात्रा
व्हे प्रोटीन: एक स्कूप में लगभग 24–30 ग्राम प्रोटीन
सत्तू: 100 ग्राम में लगभग 20 ग्राम प्रोटीन
पाचन और अवशोषण
व्हे प्रोटीन जल्दी पचता है।
सत्तू फाइबर के कारण धीरे पचता है, जिससे लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है।
पोषक तत्व
सत्तू: आयरन, मैग्नीशियम और फाइबर से भरपूर, शरीर को ठंडक देता है।
व्हे: कैल्शियम और ब्रांच्ड-चेन अमीनो एसिड (ल्यूसीन, आइसोल्यूसीन, वेलीन) से भरपूर।
प्रोटीन मात्रा (सत्तू शरबत)
सत्तू शरबत बनाने के लिए आमतौर पर 30–40 ग्राम सत्तू मिलाया जाता है, जिससे लगभग 7–10 ग्राम प्रोटीन मिलता है।
फाइबर
सत्तू में लगभग 18 ग्राम फाइबर प्रति 100 ग्राम होता है, जो पाचन और मेटाबॉलिज़्म को बेहतर बनाता है।
कैलोरी
सत्तू में 100 ग्राम में लगभग 350 कैलोरी होती हैं, इसलिए इसे नाश्ते के लिए अच्छा विकल्प माना जाता है।
सत्तू और व्हे प्रोटीन के फायदे और सीमाएँ
सत्तू शरबत
फायदे
पाचन के लिए अच्छा
गर्मियों में शरीर को ठंडक देता है
सस्ता और आसानी से उपलब्ध
सीमाएँ
प्रोटीन की मात्रा व्हे से कम
व्हे प्रोटीन
फायदे
मांसपेशियों की रिकवरी के लिए बेहतरीन
उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन
सीमाएँ
महंगा
कुछ लोगों में लैक्टोज असहिष्णुता की समस्या हो सकती है
ICMR के अनुसार सत्तू एक पारंपरिक सुपरफूड है जिसके लंबे समय तक स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं। वहीं आयुष मंत्रालय ने भी सत्तू को एक टिकाऊ और पौष्टिक खाद्य स्रोत बताया है।
हाल के वर्षों में व्हे प्रोटीन की कीमत बढ़ने के कारण लोग प्लांट-बेस्ड प्रोटीन की ओर भी बढ़ रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों में लोग प्रोटीन के लिए ज्यादा सत्तू पर निर्भर रहते हैं, जबकि शहरी फिटनेस संस्कृति में व्हे प्रोटीन अधिक लोकप्रिय है।
कौन बेहतर है?
सत्तू शरबत और व्हे प्रोटीन में से कौन बेहतर है, यह आपके लक्ष्य और जरूरत पर निर्भर करता है।
सामान्य स्वास्थ्य और कम बजट के लिए: सत्तू शरबत बेहतर विकल्प है।
मसल्स बनाने और स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन के लिए: व्हे प्रोटीन अधिक प्रभावी माना जाता है।
हालांकि शोध बताते हैं कि यदि नियमित व्यायाम किया जाए तो चना आटा (सत्तू) भी मांसपेशियों के विकास में मदद कर सकता है।
सबसे अच्छा तरीका यह है कि पारंपरिक खाद्य पदार्थों और आधुनिक सप्लीमेंट्स का संतुलित उपयोग किया जाए। साथ ही किसी भी प्रोटीन सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह लेना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। यह किसी चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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