भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी नागरिक और खालिस्तानी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की कथित हत्या की योजना से जुड़े मामले पर अपना रुख दोहराया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पन्नू हत्या मामले में दोषी ठहराए गए निखिल गुप्ता का भारत सरकार से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि 2023 में न्यूयॉर्क में गुरपतवंत सिंह पन्नू की कथित हत्या की साजिश में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। पन्नू अमेरिकी नागरिक हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खुले आलोचक माने जाते हैं।
इससे पहले शुक्रवार को 54 वर्षीय निखिल गुप्ता ने खालिस्तानी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की कथित हत्या की कोशिश से जुड़े तीन आरोपों को स्वीकार कर लिया। मोदी सरकार ने पन्नू को आतंकवादी घोषित करते हुए उनकी संस्था सिख्स फॉर जस्टिस पर प्रतिबंध लगा रखा है। सूत्रों के अनुसार, सरकार न्यूयॉर्क की अदालत में चल रही कार्यवाही के बारे में और जानकारी का इंतजार कर रही है, ताकि आगे की कार्रवाई तय की जा सके।
गुरपतवंत सिंह कौन हैं?
पन्नू को हरदीप सिंह निज्जर का करीबी माना जाता है, जिन्हें जून 2023 में पश्चिमी कनाडा के एक गुरुद्वारे के बाहर नकाबपोश हमलावरों ने गोली मार दी थी। इस घटना के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय सरकारी अधिकारियों पर संलिप्त होने के आरोप लगाए थे, जिसे भारत ने खारिज कर दिया था।
निखिल गुप्ता ने आरोप स्वीकार किए
निखिल गुप्ता पर न्यूयॉर्क सिटी में पन्नू की नाकाम हत्या की साजिश रचने का आरोप है और उन्होंने मैनहैटन की संघीय अदालत में तीन आपराधिक धाराओं के तहत दोष स्वीकार किया है। 13 फरवरी 2026 को उन्होंने अदालत में इन आरोपों को मान लिया। अब उन्हें इन धाराओं के तहत अधिकतम 40 साल की सजा हो सकती है।
निखिल गुप्ता 2024 से अमेरिकी जेल में बंद हैं। जून 2024 में चेक गणराज्य से प्रत्यर्पण के बाद से वे ब्रुकलिन की संघीय जेल में कैद हैं। उन्हें इससे एक साल पहले चेक गणराज्य में गिरफ्तार किया गया था। अमेरिका प्रत्यर्पण के तुरंत बाद उन्होंने अपने खिलाफ लगे आरोपों को झूठा बताते हुए खुद को निर्दोष बताया था।
आरोप है कि निखिल गुप्ता ने एक भारतीय अधिकारी के साथ मिलकर गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रची। हालांकि भारत सरकार ने पन्नू के खिलाफ किसी भी साजिश से खुद को अलग बताते हुए कहा है कि इस तरह की कार्रवाई सरकारी नीति के खिलाफ
- 17 February, 2026
Share: